“बीमार बैठे हैं”…

°°°
सोच-समझकर चलना राह में , नशे के तलबग़ार बैठे हैं ।
कर लेंगे बिरादरी में शामिल , सोचकर तैयार बैठे हैं ।
••
कुछ प्यार की बेहद दीवानगी में , इस दुनिया को भूल गये ,
तो कुछ प्यार के पहरेदार , न जाने क्यूँ बेज़ार बैठे हैं ?
••
चारदीवारी से पूछ लो , हर अहसास का किस्सा कहेंगे ,
मिल पाये न सबको तसल्ली , फिर भी ये बेक़रार बैठे हैं ।
••
एक ज़रा-सी बात थी , जिसकी बेबाक चर्चा हुई गली-गली ,
और बतायें क्या हाल , कितने क्या कुछ नहीं विचार बैठे हैं ?
••
ग़मों को भुलाने का सटीक नुस्खा , कोई इनसे पूछो मत ,
बस अपने ही धुन में , मैख़ाने में सब मयख़्वार बैठे हैं ।
••
दर्द से कराहते बहुत-से दिल हर मामले में हैं चुपचाप ,
और कुर्सी में बिंदास , ये सियासत के इज़्ज़तदार बैठे हैं ।
••
किस गली से सकुशल निकलना है आसान , कहना ज़रा मुश्किल ,
यहाँ पर तो हर गली में मानसिक रोगी बीमार बैठे हैं ।
••
सफलता कभी भी कदम चूम सकती है , बात कौन समझाये ?
निराशा में बहुत जल्दी ये कुछ लोग हिम्मत हार बैठे हैं ।
••
कभी “कृष्णा” की गली में भी आकर , एक बार देखना यार ,
तेरी ख़ातिर हम भी ख़ुद को कितना ज्यादा सुधार बैठे हैं ।
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 18/04/18 )

         

Share: