ये जो दिल मिले हैं

ये जो दिल मिले हैं, कुछ तो राब्ते हैं
ज़िन्दगी का सफर,रास्ते मय-क़दे हैं।।

खैर माँगी जो तुमसे,कुछ तो सोचा था
यूँ दिल जलाने के अब यही मरहले हैं

क़लबो में नाम मेरा,जुदाई की जुस्तुज़ू
ज़र्द पत्ते हवा से खौफ़ खाये हुए हैं।।

दुश्मनो की फ़ौज से हम कहाँ डरे है
जब सामने अपने ही दुश्मन बने हैं।।

हर बार मुस्कुराते, दर्द सहने पड़े है
यूँ ज़िन्दगी के तमाम कायदे बड़े हैं।।

नग़मे सुनाते रहे,यूँ अब दर्द बताते रहे
इश्क का एहसास लिए इश्क लिखे हैं।।

सागर की लहरें, उसकी ख़ामोशी बड़ी है
ज़ीस्त मुश्किल पड़ी हैं,वो सामने खड़े हैं।।

-आकिब जावेद

         

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