रूठ मत बिगड़ी हुई तक़दीर की मानिंद

++ग़ज़ल ++(२१२२ २१२२ २१२२ २ )
रूठ मत बिगड़ी हुई तक़दीर की मानिंद*( *तरह)
ज़िंदगी को मत बना ता’ज़ीर* की मानिंद (*सज़ा )
***
मिल मुहब्बत से अगर दिल जीतना मक़सद
गुफ़्तगू मत कर किसी तक़रीर* की मानिंद (*भाषण )
***
दास्तान-ए-ग़म बयां करना सदा अच्छा
रह न अब ख़ामोश सी तस्वीर की मानिंद
***
एक तूफ़ां ला मेरे दिल के समंदर में
आ मुक़म्मल ख़्वाब की ताबीर* की मानिंद (*ख़्वाब का नतीजा बताना )
***
फैसला कर दिल जला या दिल को रोशन कर
प्यार कर या काट दे शमशीर की मानिंद
***
इश्क़ गर नाकाम तो होता है जू-ए-खूं*(*खून की नदी )
हो मुक़म्मल तो है जू-ए-शीर* की मानिंद (*दूध की नदी )
***
तोडना मुश्किल बहुत है प्यार का धागा
ये जकड़ता है किसी जंजीर की मानिंद
***
दिल की बातें दिल लगाकर सुन तो समझेगा
ये नहीं हैं बेमज़ा तहरीर* की मानिंद (*लेखन )
***
हिज़्र के दिन के मज़े लेना ‘तुरंत’ अब सीख
घूमता है क्यों किसी दिलगीर* की मानिंद (*दुखी )
***
गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत ‘ बीकानेरी

         

Share: