शहर में अटपटा सा होगा

शहर में वो ज़रा .कुछ अटपटा सा होगा
भीड़ के साथ होगा पर कटा सा होगा

चीख़ मज़लूमों की तो आई होगी उस तक
दिल जो पिघला कलेजा .भी फटा सा होगा

उसके कमरे में ज़बरन धूप कब आई है
खिड़की वा होगी पर्दा हटा सा होगा

सलवटें यूं खबर ताज़ा पे आईं देखो
अखबार ए वक़्त भी अब तो फटा सा होगा

हम करेंगे जरूर अब फिक्र मत करना तुम
उनका हर बार ये उत्तर रटा सा होगा

ज़ख़्म खाया बदन उसका बयां करता है
सामने दुश्मनों के वह डटा सा होगा

         

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