ख़ूबसूरत वतन चाहता हूँ

नया अब यहाँ मैं चलन चाहता हूँ
सभी के दिलों में लगन चाहता हूँ

तड़पता हुआ वो मिले अब कभी ना
मचलते दिलों का मिलन चाहता हूँ

भरोसा न टूटे यहाँ अब किसी का
सभी के लिए मैं अमन चाहता हूँ

जहाँ मिल रहेंगे सुख चैन से सब
वही ख़ूबसूरत वतन चाहता हूँ

यकीं है कि राकेश मरुँगा न ज़्ल्दी
दफ़न के लिए क्यूँ कफ़न चाहता हूँ

         

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