ज़हर या जाम अब खुदा जाने

क्यों हूँ नाकाम अब ख़ुदा जाने
मेरा अंजाम अब ख़ुदा जाने

मैं तो निकला तलाश-ए-मंज़िल में
हो कहाँ शाम अब ख़ुदा जाने

दोस्तों में कोई तो दुश्मन है
कौन है नाम अब ख़ुदा जाने

नेकियां डालता हूँ दरिया में
मेरा इनाम अब ख़ुदा जाने

उसने भेजा था इक लिफ़ाफ़ा भी
क्या है पैग़ाम अब ख़ुदा जाने

वो मरे वास्ते तो अच्छा है
क्यों है बदनाम अब ख़ुदा जाने

साद ने एतबार में है पिया
ज़हर या जाम अब ख़ुदा जाने

अरशद साद रूदौलवी

         

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