आंखो मे बरसात

बेबसी आँखों में बरसात लिए बैठी है
दर्द ही दर्द मिरी ज़ात लिए बैठी है

मुफ़लिसी किस से करे कोई शिकायत उस की
दिल पे जो अपने वो सदमात लिए बैठी है

ज़िंदगी लाख सवालों की है ज़द में तो किया
मौत सारे ही जवाबात लिए बैठी है

कोई रोता कोई हँसता है परेशां कोई
ज़िंदगी ऐसे ही हालात लिए बैठी है

तीरगी चांद सितारों को बदन पर ओढ़े
अपने दामन में हसीं रात लिए बैठी है

ये मुहब्बत की कहानी तो हमेशा ही साद
सर्द आहों की ही सौग़ात लिए बैठी है

अरशद साद रुदौलवी

         

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