आईना कौन था

तेरे चेहरे का ऐ महजबीं आईना कौन था
मैं अगरचे ना था फिर बताओ ज़रा कौन था

वो अना थी तिरी या तिरे हुस्न का था ग़रूर
जो बढ़ाता रहा दरमियाँ फ़ासिला कौन था

तीरगी हमसफ़र बन के चलती रही रात-भर
दोस्तो वरना सफ़र में मिरा कौन था

पांव के आबले दे रहे हैं गवाही सनम
उम्र-भर हिज्र का बोझ लेकर चला कौन था

मेरी मंज़िल था तू तेरी मंज़िल था मैं हमसफ़र
ये बता रास्ते में जुदा फिर हुआ कौन था

ग़र्क़ साहिल पे कश्ती मुहब्बत की क्यों हो गई
कश्ती-ए-इश्क़ का ए सनम ना-ख़ुदा कौन था

कोई बंजर ज़मीं थी या सहरा कोई साद वह
“टूट कर जिस पे बरसी भयानक घटा कौन था”

अरशद साद रूदौलवी

         

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