आज घर अब बदल रहा हूँ मैं

आज घर अब बदल रहा हूँ मैं
तेरे  दिल  से निकल रहा हूँ मैं

तेरी  यादों  में  दिन  गुजारेंगे
खुद में ही अब पिघल रहा हूँ मैं

नाम  मेरा  न  तू  कभी  भूला
सोचकर खुद ही जल रहा हूँ मैं

वक़्त था  मेरा  भी  कभी साया
कोई  गुजरा  वो  पल  रहा हूँ मैं

तेरी  आँखों  में  दे  दी  वो  यादे
याद  करके  सम्भल  रहा  हूँ मैं

-आकिब जावेद

         

Share: