आप से बिछड़े ज़माना हो गया।

आप से बिछड़े ज़माना हो गया।
दर्द से रिश्ता पुराना हो गया ।।

दर्दे दिल दर्दे मुहब्बत ही मिला।
जुर्म क्या दिल का लगाना हो गया।।

देखकर तुमने निगाहें फेर लीं।
सब्र ये तो आज़माना हो गया।।

आप मुझसे क्या ख़फ़ा रहने लगे।
दिल ग़मों का फिर आशियाना हो गया।।

अब ग़मों मे सोज़ भी बाक़ी नहीं।
ज़ख्म-ऐ-दिल शायद पुराना हो गया।।

इश्क की हम आग मे जलते रहे।
आग मुश्किल अब बुझाना हो गया।।

दिल कहीं लगता नहीं है आज कल।
मेरा दिल तेरा दिवाना हो गया।।

तुम गये “अंशु” को जब से छोड़कर।
फिर ग़मों से दोस्ताना हो गया।।

©अंशु कुमारी

         

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