गली तेरी ,रात थी मेरी

सितारे भी जल जल बुझ लिए सारे हैं
तुझे ही ढूंढ़ते रात हम ज़िन्दगी हारे है

******

रचनाकार ने अपनी रचना पोस्ट के बाद , 26/01/20 को एडिट कर खुद हटवा दी है , वह अभी इसे यहाँ पढ़ने के लिए उपलब्ध नहीं कराना चाहते , कारण-  पुस्तक में प्रकाशन

नोट – चित्र और शिर्षक नहीं हटाया गया है काग़ज़दिल पर प्रकाशन की तारीख के साथ ।

*********
Registered CopyRight.-N -455/89
******
… युवराज अमित प्रताप 77

         

Share: