तरसोगे मुहब्बत को

मेरी सी कहीं तुमको  ये शोहबत न मिलेगी|
तरसोगे मुहब्बत को मुहब्बत न मिलेगी|
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इस दिल में रखे तुम तो हो नायाब नगीना,
नीलाम हुए भी तो ये कीमत न मिलेगी|
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तड़फाके मुझे तुम भी तो अब कैसे हँसोगे,
सारों में मेरी जैसी ही आदत न मिलेगी|
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पत्थर न बनो यार ये सोचो भी यूँ मुझको,
मिट्टी में मिला तुमको भी शोहरत न मिलेगी|
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देखोगे कभी राह भी आने की मेरी तुम,
लेकिन न मिलूँ मुझको भी फुरसत न मिलेगी|
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मालूम मनुज को भी आ चूमोगे किसी दिन,
रोओगे मगर लाश में हरकत न मिलेगी|

         

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