तो चले जाएंगे I

ग़ैरते दिल को बचा लें तो चले जाएंगे I

हासिले यक़ीन भुला दें तो चले जाएंगे I

बड़ा ही बोझ है सिर पे तेरे एहसानों का I

शुक्रिया ज़िंदगी कह लें तो चले जाएंगे I

फ़िर कहाँ उससे मुलाकात कभी होनी है I

ज़ेहन में चेहरा बसा लें तो चले जाएंगे I

जाने क्यूँ अब भी वो अपना सा हमें लगता है I

उसे बेगाना बना लें तो चले जाएंगे I

मेरे अफ़ताब ने ही खाक़ की तक़दीर मेरी I

मरहम ए चाँद लगा लें तो चले जाएंगे I

सुकून देते हैं अल्फ़ाज़ भी पन्नों पे उतर के I

इक ग़ज़ल और बना लें तो चले जाएंगे I ©तनूजा उप्रेती

         

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