दिल बहुत रोया होगा

उसकी हसरत को ग़ुरवत ने जब डुबोया होगा
लब ख़मोश ही रहे होंगे दिल बहुत रोया होगा

उसके भी सीने में कुछ अरमान तो रहे होंगे
छोटा सा सही ख़़्वाब उसने भी पिरोया होगा

बर्दाश्त न हुए होंगे उससे जमाने के सितम
दर्द को तब अपने ही आंसुओं से धोया होगा

हर बार ही वह सहम सिमट सा गया होगा
जब बेरुख़ी का तीर जमाने ने चुभोया होगा

हालात से शिकस्तें जब मिली होंगी उसको
कई बार ख़ुद का ही यक़ीन तब खोया होगा

थका वह भी होगा मज़बूरियों के साये में तब
कांधे पे राकेश उसने हालात को ढोया होगा

         

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