“फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?”…

°°°
दिल की हर धड़कन तेरे नाम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?
मेरी हर साँस तेरा ग़ुलाम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?
••
तुझसे अलग कभी भी अपने-आपको माना ही नहीं ,
तेरे बिना कहाँ सुबहो-शाम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?
••
ज़िंदगी में तू शामिल नहीं तो मतलब नहीं ज़िंदगी का ?
तेरे बिन जब जीना हराम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?
••
बेरंग फ़िज़ा है जिसमें तेरी कोई खूशबू नहीं ?
तुझपे कभी लगाऊँ न इल्ज़ाम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?
••
तू ज़ेहन में बस चुकी है हमदम सात जन्मों के लिए ,
अब सूझता नहीं कोई काम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?
••
तेरे प्यार में खोये इस तरहा कि कुछ परवाह नहीं ,
ज़माने ने कर रखा बदनाम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?
••
सब पूछते हैं अक्सर , कहाँ खोये रहते हो “कृष्णा” ,
उधर रुह का अग़र है क़याम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 24/05/2019 )

         

Share: