फेंकना है वो पत्थर उठा करके अब

लौट आया हूँ मैं चोट खाकर के अब|
फाइदा कुछ नहीं दिल लगाकर के अब|
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रास्ता रोकता है बुलन्दी का जो,
फैंकना है वो पत्थर उठाकर के अब|
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दोस्ती के न काबिल रहे हम मगर,
दुश्मनी जायेंगे पर निभाकर के अब|
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मुझको तकलीफ बस एक ही बात की,
तुम हँसोगे किसे यूँ जलाकर के अब|
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कोई कीचड़ उछाले न जानिब मेरी,
आ गया बज्म में मैं नहाकर के अब|
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याद करना मनुज याद रखना भी ये,
वक्त जाया न करना बुलाकर के अब|

         

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