भरोसा खुदा पर किये जा रही हूं

भरोसा खुदा पर किये जा रही हूं।
मुसीबत से अपनी लड़े जा रही हूं।।

मिले ज़ख्म जो वक्त उस को भरेगा
इसी आस पर मैं जिये जा रही हूं।।

मुझे प्यार का रोग जिसने लगाया
उसे भी दुआ मैं दिये जा रही हूं।।

कई ख्वाब आंखों में मरने लगे हैं
मगर ख्वाब फिर भी बुने जा रही हूं।।

तेरी ज़िन्दगी में सदा रौशनी हो
यही सोच कर मैं जले जा रही हूं।।

ना राहों में जुगनू ना तारा है लेकिन
मैं मंजिल की जानिब बढ़े जा रही हूं।।

कहीं तो मिलेगी मुझे अंशु मंज़िल
यही सोच कर मैं चले जा रही हूं।।
©अंशु

         

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