वो कलियां मसल रहा है

हर फूल इस चमन का रोया है क्यों बतादे|
दुनियां में दर्द रब यूँ बोया है क्यों बतादे||
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हैवान अब यहाँ पर कलियां मसल रहा है,
इन्सान इस जहां से खोया है क्यों बतादे|
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दिखता नहीं तुझे भी जुल्मों सितम जमीं का,
ऐसे खुदा कहाँ पर सोया है क्यों बतादे|
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शबनम नहीं ये आंसू टपके हैं जो जमीं पर,
यूं चाँद रातभर ये रोया है क्यों बतादे|
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चीखों से आसमां अब फटता नहीं मनुज ये,
धरती ने बोझ दुख का ढोया है क्यों बतादे|

         

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