वो ख़ाब कोई आँखों में पलने नही देते

वो  ख़ाब  कोई  आँखों  में पलने नही देते।।
गुलशन में नये गुल कभी खिलने नही देते।।

दस्तक़ किसी की दिल में सुनाई नही देती।।
हम  ख़ाब सुनहरे  यूं  ही पलने  नही  देते।।

यूं गेसुओँ  में  उलझी  हुई हैं नज़र उनकी।।
हम चाल  उनकी कोई भी चलने नही देते।।

वैसे  तो  कई  रतजगे  हमने  भी किये हैं।।
पैकर  में  हमे  अपने  वो  ढलने नही देते।।

वो अर्श से हर  लम्हात दिल की सुने मेरी।।
वो  मेरी  दुआओ  को भी टलने नही देते।।

वो तोड़ता हैं  मुझको  व खुद ही टूटता है।।
खाबो को अपने हम ही कुचलने नही देते।।

वो  रूह कब्ज़ करके ही आँखों में बसाए।।
आँखों से वो आकिब’ यूं पिघलने नही देते।।

-आकिब जावेद

         

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