सितम नाज़ तो देखो

‘सितम नाज़ तो देखो’

आँखों से हया टपके है अंदाज़ तो देखो।
नाज़ुक से मेरे दिल पे सितम नाज़ तो देखो।

चाहत ने उसी की हमें दीवाना बनाया,
अंजाम खुदा जाने है आगाज़ तो देखो।

क्या जोशे-मुहब्बत का तुम्हें हाल बतायें,
टूटा जो मेर दिल का वो साज तो दखो।

तहरीर दिलो-जां पे ये तुमने लिखी है,
नगमात वही गाये हैं आवाज तो देखो

आँसू भी वही दर्द के साये भी वही हैं,
रौशन येे वही ज़ख़्म हैं एजाज़ तो देखो।

उल्फ़त में सदा खेल गया जान पे अपनी,
किस दौर से गुजरा है ये जांबाज़ तो देखो।

माज़ी को सदा तुम ने ही हरदम है कुरेदा,
टपके है लहू जख़्म से जाँ-बाज तो देखो।

क्या शौंक ए बुतां है कि जी-भर के रुलाना,
हंस-हंस के जिये जाए है ऐ ‘राज’ तो देखो।
—राजश्री—

         

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