सूखा गुलाब

सूखा गुलाब मेरी हथेली पे रख गये|
अपना नकाब मेरी हथेली पे रख गये|
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मेरी तो इल्तजा थी खुशी के लिए मगर,
बिखरा वो ख्वाब मेरी हथेली पे रख गये|
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क्या क्या सितम किये थे जमाने ने उनके साथ,
सारा हिसाब मेरी हथेली पे रख गये|
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यूँ कर बढ़ा गये हैं वो जालिम तलब मेरी,
थोड़ी शराब मेरी हथेली पे रख गये|
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रूमाल तो मेरा ही था  लेकिन वो पौंछ कर,
आँखों का आब मेरी हथेली पे रख गये|
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हर वर्क पर लिखे जो तराने मनुज वही,
वापस किताब मेरी हथेली पे रख गये|

         

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