हंसी हंसी में हमसे वादे हज़ार कर दिया

हंसी हंसी में हमसे वादे हज़ार कर दिया,

आया वक़्त निभाने से इनकार कर दिया..

किस पर भरोसा करें किसे अपना कहें,

अपनों ने ही खंजर पीठ के पार कर दिया..

नज़रों से उसके घायल बहुत हैं शहर में,

बातों से जाने कितनों को बीमार कर दिया..

सुनाते देखा सबको किस्से बेवफ़ा यार के,

कहानियों ने मोहब्बत को बाज़ार कर दिया..

कसमे खाया करते थे साथ जीने मरने के,

पूंछा जो याद है वो दिन इनकार कर दिया..

चर्चे आम हैं शहर में उसकी कामयाबी के,

गलतफहमियों ने हमारे बीच दीवार कर दिया..

अंजान अकेले हक़दार हैं उसके इल्जामों के,

खुशी उसकी थी इस लिये स्वीकार कर दिया..

_______आकर्षण दुबे ( अंजान )

         

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