दबाव ऐसा था

टुट जाता कसाव ऐसा था।
गाँठ कोई तनाव ऐसा था।
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जिंदगी की जले चिता कोई।
मेरे भीतर अलाव ऐसा था।
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रास्ते मेरे सब तुम्हारी ही।
सिम्त आये घुमाव ऐसा था।
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बह गया नाम जिंदगी का ही।
ख्वाहिशों का बहाव ऐसा था।
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मैं मरूँ या मरे मेरा ईमान।
जीने का कुछ दबाव ऐसा था।
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और कोई सुनी नहीं दस्तक।
क़ल्ब का रखरखाव ऐसा था।
कुलदीप गर्ग तरुण

         

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