“अच्छा लगा”…

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यूं तेरा हर बात मुझको समझाना अच्छा लगा ।
तेरे आगे ख़ुद नादान हो जाना अच्छा लगा ।
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‘आप’ के संबोधन में कुछ ज्यादा ही दूरियाँ थीं ,
‘तू’ कहकर अब निसंकोच पास आना अच्छा लगा ।
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वैसे तो दोस्तों की बहुत भीड़ है फ्रेंड लिस्ट में ,
मगर सच , तेरा दोस्त मुझे कहलाना अच्छा लगा ।
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लोग क्या कहेंगे हमारे बारे में सब जानकर ,
ये सोचकर बार-बार जोड़-घटाना अच्छा लगा ।
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तेरा आज के भागमभाग ज़िंदगी के दरम्यान ,
अपना समझ के हर बात को सुनाना अच्छा लगा ।
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बहुत-सी परतें जम गई थीं दिमाग के ज़मीन पर ,
आहिस्ता से इन परतों को हटाना अच्छा लगा ।
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भले “कृष्णा” से तेरी अब मुलाकात नहीं होती ,
मगर उसे यादों में हर पल बसाना अच्छा लगा ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 27/04/2018 )

         

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