चाहत को लाचार नहीं कर सकती

अपनी चाहत को मैं लाचार नहीं कर सकती।
खुद को इतना भी मैं बीमार नहीं कर सकती।

बेवफ़ा नाम मुहब्बत में मुझे दे दो तुम।
घर की दहलीज मगर पार नहीं कर सकती।।

ज़िन्दगी तुम से मुहब्बत मैं निभाऊ कैसे।
मैं किसी और से अब प्यार नहीं कर सकती।।

मेरी चाहत का जो एहसास तुम्हें हो जाए।
अपनी चाहत से भी इंकार नहीं कर सकती।।

प्यार करती हूं तुम्हें प्यार से ज्यादा लेकिन
मैं कभी प्यार का इजहार नहीं कर सकती।।

बिन तुम्हारे मुझे जन्नत भी अगर दे कोई।
मैं किसी हाल में स्वीकार नहीं कर सकती।।

दार पे अंशु को चढ़ना भी अगर पड़ जाए।
प्यार अपना सरेबाज़ार नहीं कर सकती।।
©अंशु कुमारी

         

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