“आज मेरे साथ में”…

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2122 212 2122 212
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आज मेरे साथ में…तुम सनम रहना जरा ।
और मेरे प्यार में क्या मिला कहना जरा ।
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भूल जाना आज …. कोई विरह की बात को ,
नयन में कुछ अश्क़ बहते दिखे , सहना जरा ।
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रोकना मत आज …. सब वारदाते-इश्क़ को ,
रूककर तुम आज इस सफ़र में बहना जरा ।
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बोलने की अगर कुछ बात हो तो ….. बोल दो ,
और लब कुछ कह न पाये सुनो , थमना जरा ।
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एक घर है , एक हमसफ़र , सुन ओ नाज़नीं ,
जान ! इस हालात में…साँस पर बसना जरा ।
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बेनियाज़ी से बहुत मन सहम जाता…सुनो ,
पास रहके अब रिक्त स्थान को भरना जरा ।
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दरअसल …….. मेरे नसीबा अभी साथी बने ,
सो अभी “कृष्णा” कहे बस यहीं जमना जरा ।
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