आ गये हैं छोड़कर रब की इबादत देखिये

++ग़ज़ल++(2122 2122 2122 212)
आ गये हैं छोड़कर रब की इबादत देखिये |
इस क़दर है आपकी उल्फ़त की चाहत देखिये |
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चैन से जीना न मरना है हमारे हाथ में
आप ने करदी हमारी कैसी हालत देखिये |
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वस्ल का वादा किया फिर क्या सबब आये नहीं
वक़्त बीता जा रहा उसकी नज़ाक़त देखिये |
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कब मिलेगा आप से मौका हमें इक़रार का
साफ़ अब कह दीजिये कब हो इनायत देखिये |
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ख्वाब में दीदार से होती न पूरी आरज़ू
कब तलक हों रूबरू मिलती है राहत देखिये |
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रंग गोरा क्या ज़रूरी वास्ते अब इश्क़ के
आपकी आँखों में है उनकी सबाहत देखिये |
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कुछ नहीं हासिल कभी होता खड़ी दीवार कर
कारगर होती हमेशा ही मुहब्बत देखिये |
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कर रहे इंसान जैसा काम फल हासिल वही
है यहीं दोज़ख यहीं मिलती है जन्नत देखिये |
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ज़िंदगानी क्या भरोसा साथ कब छोड़े ‘तुरंत’
प्यार कीजै है खड़ी सर पर क़यामत देखिये |
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी |

         

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