“इन दिनों” …

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कुछ हसीन सुनहरे ख़्वाब सजने लगा है इन दिनों ।
हसरतें दिल से बहुत-कुछ कहने लगा है इन दिनों ।
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आया था ज़रूर बहुत तेज आँधियों का काफ़िला ,
मगर देर-सबेर गुबार हटने लगा है इन दिनों ।
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तलाश खत्म हुआ खुशग़वार मुहब्बत के पलों का ,
हसीन पल मेहमान बन रहने लगा है इन दिनों ।
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क्या हुआ , कैसे हुआ , कुछ बता पाना मुमकिन नहीं ?
ज़ेहन में कोई सूरत बसने लगा है इन दिनों ।
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जानना मुनासिब नहीं , वो नींद का आलम कहाँ ?
खोये-खोये हालात सँवरने लगा है इन दिनों ।
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उम्मीद है आगे का सफ़र बेहद हसीन होगा ,
एक हमसफ़र साथ-साथ चलने लगा है इन दिनों ।
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ज़रा छूकर ज़रूर जगा दो , इस “कृष्णा” को यारों ,
ख़्वाबों में दूर तलक ये पलने लगा है इन दिनों ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 08/12/2018 )

         

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