“ऐ दिल तू ही बता”…

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किसके लिए है धड़कता , ऐ दिल तू ही बता ?
किसके मन में है बसता , ऐ दिल तू ही बता ?
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तन्हाई दूर निकली , खत्म हुआ फासला भी ,
अब कौन तुझे क्या कहता , ऐ दिल तू ही बता ?
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ज़िक्र में जब कभी उसका नाम सामने आये ,
इतना तेज क्यों मचलता , ऐ दिल तू ही बता ?
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सोची हुई हर बात हक़ीक़त हो या मत हो ,
फिर भी स्वप्न क्यों पलता , ऐ दिल तू ही बता ?
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उसके क़रीब कोई गया , हो जाता बवाल ,
इस कदर बहुत क्यों जलता , ऐ दिल तू ही बता ?
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बिना उसके जीना हो रहा है बहुत मुश्किल ,
श्वास बिना कोई रहता , ऐ दिल तू ही बता ?
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“कृष्णा” अब बस उसके रंग में रंग गया है ,
उसके जैसा क्यों ढलता , ऐ दिल तू ही बता ?
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— °•K.S. PATEL•°

         

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