करीब आओ सनम आ गई है रात हसीं .

++ग़ज़ल++(1212 1122 1212 22 /112 )
करीब आओ सनम आ गई है रात हसीं .
करो न, आज करम आ गई है रात हसीं .
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बना अदू* ये हसीं नाक का गुहर** हमदम (*दुश्मन)(**मोती )
लबों को दो, न क़सम आ गई है रात हसीं .
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सवाल की है नहीं आज अहमियत* कोई (* मूल्य )
जवाब देंगे न हम आ गई है रात हसीं .
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क़रार आये ज़रा अब सनम इधर की तरफ
बढ़ाइए न, क़दम आ गई है रात हसीं .
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हुज़ूर क्यों है अभी तक बना रखी दूरी
रखो न कोई वहम आ गई है रात हसीं .
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सखी सहेली ने जो आपको सिखा भेजा
न मशवरे में है दम आ गई है रात हसीं .
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खुले दरीचे* करें दिल के, हाथ में अपने (*खिड़कियां)
लो इश्क़ का ये अलम* आ गई है रात हसीं .(* झंडा)
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मुराद आप को पाना रही है जन्मों से
सफल हुआ ये जनम आ गई है रात हसीं .
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‘तुरंत’ देख के परवाज़ आज सपनों की
मिटे हैं सारे अलम* आ गई है रात हसीं .(*दुःख ,ग़म)
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी .

         

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