कहर

हुआ है ये कहर कैसे
जला है ये शहर कैसे

किनारे सब चले आओ
उठी है ये लहर कैसे

सहा जाता नही अब गम
गुजारे ये पहर कैसे

ऐ जानेमन कहा है तू
मिले तेरी खबर कैसे
..निखील कुमार सिंह..

         

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