किया किसी ने है जादू कमाल आँखों से

++ग़ज़ल++( 1212 1122 1212 22 )
किया किसी ने है जादू कमाल आँखों से |
बिछा दिया है मुहब्बत का जाल आँखों से |
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ये नूर रुख का सनम आज ढा रहा है सितम
झलक रहा है गजब का जमाल आँखों से |
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ये तिश्नगी तो हमारी हुजूर बढ़नी थी
पिला रहे हो हमें बेमिसाल आँखों से |
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जुबान से तो सभी हम कलाम होते हैं
मगर करे वो जवाब-ओ-सवाल आँखों से |
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अजब अदा से वो रूठे कोई जवाब नहीं
भगाएं कैसे ये भड़का जलाल आँखों से |
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करेंगे बात छुपाने की लाख कोशिश भी
बयां हुए है सभी हालचाल आँखों से |
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ग़मों में बुझते चरागों सी तीरगी देखी
कभी खुशी में है देखा धमाल आँखों से |
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निगाहेनाज़ उठाकर जरा इधर देखें
तलाश हम लें नया कुछ ख़याल आँखों से |
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हजार लोग हैं डूबे समझ इसे दरिया
हुए ‘तुरंत’ है कितने हलाल आँखों से |
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी |

         

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