“क्या कह दूँ तुम्हें”…

°°°
दिल में सनम कुछ अच्छी बात है , क्या कह दूँ तुम्हें ?
कुछ दिलक़श अनकही जज्बात है , क्या कह दूँ तुम्हें ?
••
मेरी प्रीत का तेरी गली है आना-जाना ,
मेरे इश्क़ की शुरुआत है , क्या कह दूँ तुम्हें ?
••
कभी मिलने की कसक , कभी ज़ुदा होने का डर ,
सच्ची कटता नहीं दिन-रात है , क्या कह दूँ तुम्हें ?
••
ख़्वाब में मिलोगी सोचकर जल्दी सो जाता हूँ ,
कुछ अज़ीब-सी अब हालात है , क्या कह दूँ तुम्हें ?
••
कोई क़सूर बताये क्या है दीवानगी की ,
जीतकर भी इक पाई मात है , क्या कह दूँ तुम्हें ?
••
ये सब्रो-क़रार का खेल भी निराला है बिल्कुल ,
अलग-सा ये इश्क़ की जात है , क्या कह दूँ तुम्हें ?
••
“कृष्णा” को पढ़ लेना ज़रा-सा वक़्त निकालकर ,
वाक़ई तू भी क़रामात है , क्या कह दूँ तुम्हें ?
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 18/05/2019 )

         

Share: