प्यार तो सब गिले शिकवे भी भुला देता है

ग़ज़ल
इश्क़ वो आग है हर कोई लगा देता है।
प्यार मे कौन मुहब्बत का सिला देता है ।।

लाख समझाया समझता ही नही दिल मेरा ।
टुट कर फिर से बिखरने की सज़ा देता है ।।

दर्द सहना ही मुहब्बत की निशानी है अब।
कौन अब दर्द ए मुहब्बत की दवा देता है।।

जख्म ही जख्म दिये प्यार के बदले तुम ने।
जख्म सह कर भी ये दिल तुम को दुआ देता है।।

आप को हम से मुहब्बत ही नही थी शायद।
प्यार तो सब गिले शिकवे भी भुला देता है।

तुम भुला दोगे मुझे, मैं नहीं भूलूंगी तुम्हें।
दिल ये “अंशु” का हमेशा ही सदा देता है।।
     ©अंशु कुमारी

         

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