“जी करता है”…

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तेरी जूड़े का फूल बनकर सजने को , जी करता है ,
तेरे इर्द-गिर्द पूरा ज़हां बनने को , जी करता है ।
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मेरी अमिट यादों में तू हो गयी है इस तरह शामिल कि ,
तेरी साँसों में जीवन भर बस बसने को , जी करता है ।
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बना ले मुझे अपनी लबों की सुर्ख लाली ओ नाज़नीन ,
एक ख़्वाहिश तेरी अधर पे अब फबने को , जी करता है ।
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क्या ख़ूब गजब की तेरी पायलिया की ये छम-छम-छम-छम ,
तू जहाँ भी जाए , तेरे साथ चलने को , जी करता है ।
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तेरी संगत में क्या कहूँ , है एक नायाब-सुंदर क़शिश ,
फ़िज़ा में तेरी खूशबू संग महकने को , जी करता है ।
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तेरी आँखों में देखकर अपनी छवि हसीं लगती ज़िंदगी ,
और फिर एक ख़ूबसूरत ख़्वाब पलने को , जी करता है ।
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“कृष्णा” आज किया अपनी ज़िंदगी की डोर तेरे हवाले ,
और सच में यार ! तेरे संग चहकने को , जी करता है ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 24/04/2019 )

         

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