“तुमसे मिलकर”…

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हर एहसास हमदम हो गया है तुमसे मिलकर ।
ये प्यार भी तो चरम हो गया है तुमसे मिलकर ।
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तेरी अदा का बस मैं ही एक दीवाना नहीं ?
ये वक़्त भी तो सनम हो गया है तुमसे मिलकर ।
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इतने सालों से पाये सूखेपन का क्या कहें ?
एक झटके में ख़तम हो गया है तुमसे मिलकर ।
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अब ऐसा लगता है आजकल मानो दर्द नहीं ,
आज सारा ग़म हज़म हो गया है तुमसे मिलकर ।
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यूँ लगता है जैसे पहले की ज़िंदगी अब नहीं ?
यकीं करो , नया जनम हो गया है तुमसे मिलकर ।
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तेरी ये दोस्ती , ये वफ़ा है बहुत ही अनमोल ,
साथ जीने का भरम हो गया है तुमसे मिलकर ।
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सदा बहुत शिकायत रहती थी रब से “कृष्णा” को ,
मगर अब इल्ज़ाम कम हो गया है तुमसे मिलकर ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 02/07/2018 )

         

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