तुम ही चाहत मेरी

.—तुम ही चाहत मेरी —-
तुम ही चाहत मेरी तुम मुहब्बत भी हो।
तुम खुदा हो मेरीे तुम इबादत भी हो।

जिन्दगी तो सहज यूँ गुजर जायेगी,
है मजा तब ही जब कुछ मुसीबत भी हो।

हाल अपना सुनायें तुम्हें हम तभी,
लब कुसाई की गर कुछ इजाजत भी हो।

जिन्दगी का मजा तो है तब ही सनम,
जब शराफत  हो थोड़ी शरारत भी हो ।

दर्द ओ गम तो मिले हैं बहुत ‘राज’ को,
अब सनम हम पे थोड़ी इनायत भी हो।
——राजश्री

         

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