तेरे बारे में जब

तेरे बारे में जब सोचा नहीं था।

दिवानाथा मगर इतना नहीं था।

जुदातुम हो गये हंस करके जानां,

किनम थी आँख पर रोया नहीं था।

मुहब्बतको तेरी दिल में सजा कर,

गमे-उल्फतको मैं भूला नहीं था।

कमीक्या थी,तुम्हें गर भूल जाते,

किसीने तो हमें रोका नहीं था।

मुझेदेकर गया क्यूं दर्द इतना,

जिगरपर जख़्म जो पहला नहीं था।

किचाहा रोज़-ओ-शब जिसको हमेशा,

परायाभी नहीं, अपना नहीं था।

बना रिश्ता समंदर से जो ख़ारा,

कभीमीठा था यूं ख़ारा नहीं था।

         

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