“दिलो-जान की तरह”…

°°°
अबकी बार न मिलना किसी अनजान की तरह ।
रिश्ता अटूट है अज़ीज़ दिलो-जान की तरह ।
••
मैं नहीं कहता कि दिल में रह जाओ हमेशा ,
आ जाना ज़िंदगी में बस मेहमान की तरह ।
••
लिखूँ अहसासे-ज़िंदगी तो सुनना हाले-दिल ,
तुम हमेशा बने रहना हम-ज़बान * की तरह ।
••
कोई ज़ुनूं या ख़ुद-अज़ीयती * बिल्कुल न रहे ,
गुजर जाना इक बार किसी तूफ़ान की तरह ।
••
मैं नहीं पत्थर-दिल , बात जान लेना ज़रूर ,
मुझे भी दुख होता ग़म में इंसान की तरह ।
••
खुशी की तलाश में लग सकता है नया सफ़र ,
मगर मिट जाना नहीं कभी अरमान की तरह ।
••
ग़र शामिल हूँ ज़िंदगी में तो ज़ुदा मत करना ,
वरना ये ज़िंदगी होगी बियाबान की तरह ।
••
रूह तन से निकले तो कोई गिला मत रहे ,
सब याद रखें चाहत की दास्तान की तरह ।
••
अब और क्या बतायें , आलमे-हवास * अपनी ?
“कृष्णा” क्या लगता है इक इम्तिहान की तरह ?
°°°
* हम-ज़बान = सहभाषी
* ख़ुद-अज़ीयती = स्वयं को दुख देने की प्रवृत्ति
* आलमे-हवास = होश की दुनिया
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 06/05/2018

         

Share: