धूप में रात दिन जो जलता है

धूप में रात दिन जो जलता है
भूख लेकर वही तो पलता है

रूप उसका निखर ही आया अब
प्यार जमकर कहाँ पिघलता है

खिड़कियाँ घर में आज होतीं तो
देख पाते वो कब निकलता है

साथ उसका मिला तो है लेकिन
वक़्त रेशम सा ही फिसलता है

हाथ ‘भवि’ चूमता है वो मेरे
लम्स से जिसके दिल मचलता है

         

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