“निभाते हम हैं”…

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प्यार करते हैं तो हर पल निभाते हम हैं ।
बहुत मरते हैं तुम पर , ये बताते हम हैं ।
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पता है इश्क़ का मरहम है तुम्हारे पास ,
तभी इस अगिया में ख़ुद को जलाते हम हैं ।
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उफ़ ! तेरी मोहक अदा और ये अल्हड़पन ,
तेरी शोखियों पे ही जां लुटाते हम हैं ।
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न सुर का पता है न ही ताल का ठिकाना ,
फिर भी जानेमन तुझे गुनगुनाते हम हैं ।
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तुम किसी मोड़ पे भूल तो जाओगी नहीं ?
ये सोच अपनी याद सदा दिलाते हम हैं ।
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रोग बुरा है , ये जानते हैं ज़रूर मगर ,
चाहत में डूबकर हर ग़म भुलाते हम हैं ।
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मुहब्बत है “कृष्णा” तो एक मज़बूरी भी ,
हर पल चाहने की ज़ुर्रत दिखाते हम हैं ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 01/03/2019 )

         

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