“प्यार को चहकने दीजिए”…

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ख़्याल में जब भी आये कोई , उसे उतरने दीजिए ।
थोड़ा-सा अहसास को ज़रा घुलने-सँवरने दीजिए ।
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अपनी भावनाओं पे यूँ अंकुश लगाना ठीक नहीं ,
दिल में है अगर कोई सूरत , उसे उभरने दीजिए ।
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कुछ आप समझेंगे तो थोड़ा वो समझेंगे आपको भी ,
एक-दूजे को एक-दूसरे में बस ढलने दीजिए ।
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बड़ी मुश्किल से आ पाता है सुंदर क़शिश वाला पल ,
गुज़ारिश है , ख़ूबसूरत पल को मत गुज़रने दीजिए ।
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कुछ आगे बढ़ो तो कुछ वो भी आगे बढ़ेंगे ज़रूर ,
मिलकर दोनों सहमते हालात को सुधरने दीजिए ।
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थोड़े-से ये अल्फ़ाज़ किसी के लिए दवा है जान लो ,
समय निकालकर किसी से ख़ुद को बात करने दीजिए ।
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ज्यादा इंतज़ार में अपनी रूह को भला सक़ूं कहाँ ?
दीदार करके बेताब नज़रों को चमकने दीजिए ।
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वैसे भी आजकल फ़िज़ा में नफ़रत का दौर है इधर ,
बेहतर कि दो पल के लिए प्यार को चहकने दीजिए ।
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बहुत संज़ीदा हो अगर इन रिश्तों की बात को लेकर ,
तो दीवानगी को अपने नज़दीक ठहरने दीजिए ।
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अगर मुहब्बत का सफ़र लगता नहीं है कुछ अंजाना ,
सोचना फिर नहीं , बे-रोक-टोक उसे चलने दीजिए ।
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यूँ चुपचाप रहना भी भला कोई ज़िंदगी है “कृष्णा”,
मुस्कुराकर हर गली , हर बस्ती ख़ुद को बिखरने दीजिए ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 07/02/2019 )

         

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