“बताओ तो”…

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२१२२ २१२२ १२२२

आज हम-तुम किधर जायें सुझाओ तो ?
राज़ अब ये तुम जरा-सा बताओ तो ।
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कौन है जो उधर आ के सताता है ?
तुम उसे भी ठीक वैसे सताओ तो ।
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ये ज़माना क्या कहेगा पहेली है ,
हल करेंगे हम इसे , मुस्कुराओ तो ।
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मुहब्बत में दूरियाँ कौन चाहे है ?
साथ हरदम हमसफ़र का निभाओ तो ।
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गल्तियाँ अपनी सभी मान लूँगा मैं ,
ढूँढकर हर गल्तियाँ तुम गिनाओ तो ।
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बहुत ग़म है इधर सच में सनम देखो ,
दूर होगा कष्ट , नजदीक आओ तो ।
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जान लो अच्छी तरह प्यार “कृष्णा” का ,
औ दिल्लगी कर उसे कुछ सुनाओ तो ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 17/01/2019 )

         

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