भुलाओगे कैसे

मुहब्बत हमारी ….भुलाओगे कैसे।
खफ़ा हो के तुम दूर जाओगे कैसे।

ऩज़र मे हमारी ही तस्वीर तो है,
जमाने से उसको छुपाओंगे कैसे।

जरा सी खता पे भुलाने लगे तुम,
मगर आशिकी अब मिटाओगे कैसे।

सनम छोड़ दो जिद सताओ नही अब,
अगर रूठ गये हम मनाओगे कैसे।

लिखा खून से खत मुहब्बत भरा वो-,
जिगर से हटा कर जलाओगे कैसे।

दिलो का रहा है सुहाना सफर वो,
तड़फता हुआ छोड़ जाओगे कैसे।

योगेन्द्र कुमार निषाद
घरघोड़ा,छ०ग०

         

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