“मुलाक़ात हो गयी”…

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कई बरस के बाद अब ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गयी ।
आज मिल गया कोई और खूब सारी बात हो गयी ।
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ज़हान के रस्मों की अनसुलझी बातें अब कौन करे ?
आपस में मिल गये तो बड़ी हसीन हालात हो गयी ।
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दुआओं का आँगन न जाने कबसे सूना-सूना था ?
हरा-भरा हुआ अब , खुशियों की खूब बरसात हो गयी ।
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मौसम भी बेहद हसीं हो चला है आजकल फ़िज़ा में ,
ये दो रूहों का मिलन उसके लिए सौगात हो गयी ।
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यादों में किसी का रचना-बसना खूब कारगर रहा ,
देर से सही , महकी-महकी पूरी ज़ज़्बात हो गयी ।
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आखिरकार हमें जीत मिल ही गयी बाज़ी-ए-दिल में ,
बहुत लड़ने के बाद आखिर में ग़म की मात हो गयी ।
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यार से बातों का दौर तो बहुत दिलचस्प है “कृष्णा” ,
मगर अब सो जाओ दोस्त , सच में बहुत रात हो गयी ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 29/07/2018 )

         

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