मुहब्बत

बात कोई तो है मुहब्बत में
लोग कितना बदल गये इसमें
मेरा माज़ी बिछड़ गया मुझसे
हद से आगे निकल गये इसमें
ख़ुद को जो संगदिल समझते थे
मोम जैसे पिघल गये इसमें
इश्क़ का लेनदेन अच्छा है
खोटे सिक्के भी चल गये इसमें
दिल का आंगन चमक रहा है अब
प्यार के “दीप” जल गये इसमें
भरत दीप

         

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