मेरा दिलदार बन रहा है कोई

मुझसा मेरे भीतर भी रह रहा है कोई I दिल का हर जख्म भर रहा है कोई I किसकी आँखें हैं ता-सफ़र मेरे साथ I राह में दीपक सा जल रहा है कोई I उजागर है वो इन खामोशियों में I कैसे मेरी आवाज़ बन रहा है कोई I कुछ दिनों से मुलाक़ात भी होने लगी है I तसव्वुर से हक़ीक़त में ढल रहा है कोई I इधर उनसे तक़रार सी रहती है मेरी I बेशक़ मेरा दिलदार बन रहा है कोई I © तनूजा उप्रेती

         

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