“मेरे हुज़ूर”…

°°°
चाहे बात कुछ भी हो , मुझे ज़रूर कहना मेरे हुज़ूर ।
संगदिल है ज़माना , साथ-साथ बस रहना मेरे हुज़ूर ।
••
मुझसा कोई और घायल नहीं हो जाए तुम्हें देखकर ,
अब जरा सोच-समझकर ही तुम यूँ सँवरना मेरे हुज़ूर ।
••
बेकार ग़म की दुनिया में अब आना-जाना बंद कर दो ,
प्रीत के गलियारे में खुशी-खुशी बहना मेरे हुज़ूर ।
••
मुद्दतों बाद तो कोई मिला है परवाह करने वाला ,
आहिस्ता-आहिस्ता पुराने ज़ख़्मों को भरना मेरे हुज़ूर ।
••
सम्हालकर रखा , धरोहर समझकर तेरी अमिट यादों को ,
इन यादों को साथ लेकर ही अब गुजरना मेरे हुज़ूर ।
••
सोच लो , एक बार आ गये दिल में तो जाने नहीं दूँगा ,
मंज़ूर हो , मन की गहराई में उतरना मेरे हुज़ूर ।
••
दोनों का जब एक जैसा हाल है ये चाहत के दरम्यां ,
“कृष्णा” को अपने अरमां से अलग न करना मेरे हुज़ूर ।
°°°
— °•K.S. PATEL•°
( 02/05/2019 )

         

Share: