मोहब्बत न करो

तुमको शिकवा है अगर मुझसे मुहब्बत ना करो
या फिर आवारा मिज़ाजी की शिकायत ना करो

अक़ल से काम लो अच्छा या बुरा ख़ुद सोचो
दिल तो पागल है सुनो दिल की हिमायत ना करो

हमको दीवाना कहें लोग तो कहने दो उन्हें
आप बदमाम मगर अपनी शराफ़त ना करो

उम्र-भर साथ निभाना हो तो आ जाओ तुम
चार दिन की ये मगर मुझपे इनायत ना करो

कहने वालों ने कहा एक कहावत सुन लो
रह के दरिया में मगरमच्छ से अदावत ना करो

दिल के बदले में फ़क़त दिल का करो सौदा तुम
यूं मगर हमसे मुहब्बत की तिजारत ना करो

साद ख़ाहिश के चराग़ों को बुझा दो अब तुम
है हवा तेज़ बहुत इनकी हिफ़ाज़त ना करो

अरशद साद रूदौलवी

         

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