रू ब रू

इस क़दर तुमको रूबरू करते
शौक़ से तुमसे गुफ़्तगु करते

फूल ख़ुशबू बिहार दुनिया की
नाम तेरे ये रंग-ओ-बू करते

चांद लाते तिरे मुक़ाबिल फिर
आईना तेरे रूबरू करते

थोड़ी गुस्ताख़ियाँ भी करते हम
आप फिर तुमसे , तुमको तू करते

मौत आती जो तेरी बाँहों में
ज़िंदगी की ना आरज़ू करते

हिज्र होता अगर इबादत तो
अपने अश्कों से हम वुज़ू करते

वस्ल होता रहे सदा यूंही
हम सह्र की ना जुस्तजू करते

जैसे फिल्मों में गीत गाते हैं
इस तरह हम भी हू-ब-हू करते

शुक्र है आगए हो तुम वरना
साद ख़ुद को लहू लहू करते

अरशद साद

         

Share: